बुधवार, 20 दिसंबर 2023

 

रोटी और सत्ता पलटते रहो
और समान कोई भी खरीदो
बस दुकानदार बदलते रहो   🤣

शनिवार, 9 दिसंबर 2023

फूल

 मेरे लगाए फूल अब महकने की को तैयार है ।

मौसम हो जाओ होशियार,

 हवाएं तुम्हे बदलने की फिराक में है

शनिवार, 2 दिसंबर 2023

मजदूरों पर शायरी !

1). मजदूरों की दुनिया में भी शहंशाही खाब होता है ।
     गैर मत समझो जनाब, मजदूर भी  इंसान होता है ।।

2). हर कोई तलाश रहा था दौलत, पर कोई दौलतमंद ना मिला
 एक फकीर को छोड़कर तेरी दुनिया में कोई अमीर ना मिला

3).  खाली पेटो की जरूरत बड़ी मामूली लगी ।
       पर भरे हुए पेटो में गजब की भूख दिखी ।।

4). सिरहने से उसके वो उसकी नींद उठा लाया ।
     अमीर क्या बना किसी गरीब की रोटी ही चुरा लाया ।।

5). सुना है कस्बे में नए नए अमीर आए है ।
     जाके देखो तो जरा जाकर देखो तो जरा, 
     किसी गरीब का निवाला तो नही छीन लाएं है ।

बुधवार, 22 फ़रवरी 2023

 धन्यवाद आपका ।

सबसे पहले मैं इस बात पर गर्व करते हुए बता दूं कि हम लोग उस गुरुकुल के विद्यार्थी रहे है जहां पर हमे बताया गया था कि कहीं भी राष्ट्रगान कानो में पड़े तो वही रुक जाओ जिसका आज भी हम पालन करते है ।

10 साल की उम्र में हम तिरंगे को देखते तो आंखों से आंसू निकलने लगते थे । 

मैं यह इसलिए बता रहा हूं कि उस काल में हमारे गुरुजन कितने महान व्यक्तित्व के धनी थे । की ये  सारी चीजें हमारे अंदर बचपन में ही डाल दिए थे । पिताजी जब अपने ओजस्वी वाणी से हमे क्रांतिकारियों और आजादी के लिए संघर्ष सिपाहियो की गाथा सुनाते थे तो बस देश के लिए मर मिटने के लिए मन मचलने लगता था ।

मुझे पता नहीं की आजकल भी ऐसे गुरु है लेकिन विश्वास है ।

लेकिन अगर आपके दौर में ऐसे व्यक्ति मिल जाए तो पूरी जिंदगी गौरवान्वित महसूस करती है ।


और आपने जिन कमियों का उल्लेख किया ये गंभीर के साथ चिंतनीय भी है ।

और ये कमियां अगर खासकर अपने गांव की बात करू यहां तक की पूरे देश में भी हर जगह और हर एक तरफ से है ।

लेकिन आम जनमानस से ज्यादा दुख तब ज्यादा होता है जब कोई पढ़ा लिखा इंसान सामाजिक कुकृत्य करता है।

इसके अलावा मुझे रोना तब और ज्यादा आता है जब किसी पद पर बैठा व्यक्ति भ्रष्टाचार जैसे घृणित कार्य करता है । सरकारी और सामाजिक पूंजी से अपना घर चमकाता है ।

वो कहीं ज्यादा दोषी है समाज को गर्त में ले जाने के लिए ।

यह बात सर्वविदित है की चुनावों में कितना और क्यूं खर्च किया जाता है, आपको पता ही होगा कि ब्लाक प्रमुख, जिला अध्यक्ष बनने में करोड़ों लगाया जाता है आखिर क्यूं?

ग्राम प्रधानी में जहां मानदेय शायद ज्यादा से ज्यादा 3500 मिलता होगा वहां लाखो की संपत्ति पानी की तरह क्यूं बहा दी जाती है । क्या सिर्फ समाज सेवा के लिए ? यह सवाल जरूर प्रजातंत्र पर उठता है ।

 हां कुछ त्यागी पुरुष जरूर समाज के लिए खुद को न्यौछावर करते है लेकिन अधिकतर कहीं ना कहीं इस देश को गांव को समाज को खोखला करते है । 


और हां मैं यहां किसी पर आरोप नही लगा रहा हूं । मैं सिर्फ यह बताने की कोशिश कर रहा हूं की आम इंसान पर अगर कोई आरोप लगाए जा रहे है तो ये सिर्फ एक तरफा होगा । 

अगर आप अंधकार की बात करते है तो आज मुझे अंधकार की छाया हर ओर दिखाई देती है 

किसी एक पर दोष मढ़कर हम पूरे समाज को सही दिशा में नही ले जा पाएंगे । बल्कि हमारे लिए यह जरूरी है की हर इंसान अपना कर्तव्य करे उसका व्यक्तित्व चाहे जितना बड़ा हो ।


आज प्रजा के कर्म गलत तो है इसमें कोई संदेह नहीं लेकिन हम नेताओं के कर्मो को भी नजर अंदाज नहीं कर सकते है । और विकास के कामों के लिए दोनो जिम्मेदार है । 


इन सबके अलावा पूरा समाज अच्छी सोच का मालिक नही बन सकता क्योंकि समाज में हर तरह के लोग होते है । अगर पूरा समाज अच्छी सोच का मालिक बन सकता तो नियम कानून बनाने की और दंड विधान बनाने की जरूरत ही न पड़ती हर इंसान ज्ञानी होता समझदार होता और जागरूक होता लेकिन ऐसा ना कभी हुआ है ना ही है और ना ही होगा कम ज्यादा जरूर हो सकता है लेकिन एक राजा से एक अधिकारी से एक ग्राम मुखिया से हम जरूर ये अपेक्षा कर सकते है कि वह सदाचारी हो, समदर्शी हो जब वह सामाजिक शक्ति का उपयोग करे तो उसके लिए ना ही कोई अपना हो ना ही पराया हो ।

इसके अलावा आम जन को भी अपने कर्तव्य याद होने चाहिए, उनके प्रति सचेत होना चाहिए एवं कर्मो द्वारा स्पष्ट होना चाहिए ।

लेकिन अगर किसी पदाधिकारी के कर्म समाज के सबसे कुकर्मी व्यक्ति से भी नीचे हो जाए तो बुद्धिजीवियों को सबसे पहले उसके बारे में सोचना चाहिए क्योंकि समाज का नाश जितना वह कर सकता है उतना कोई आम इंसान नही कर सकता ।


और इस सब के अलावा कुछ अधर्मी हर युग में थे और रहेंगे भी लेकिन मुख्य उनकी संख्या में बढ़ोत्तरी होना ही मुख्य और चिंतनीय है ।

लेकिन जब राजा श्री जैसा व्यक्तित्व हो उस समाज में बुद्धिजीवियों की संख्या अधिक हो तो प्रजा भी उसी अनुरूप हो जाती है ।


इसलिए बुद्धिजीवियों का काम है की अपनी संख्या बढ़ाए बच्चो में संस्कार भरकर समाज का भविष्य तैयार करें और उस देश का राजा सदमार्ग ना छोड़ पाए, बेईमान ना बन पाए उसके लिए कार्य करें । मेरे लिए यह प्रमुख है । और यह मैं करता भी हूं अपनी तरफ से बिना भयभीत हुए । और आप मेरे अनुसार आप एक आम इंसान के गलत कर्मो पर अंकुश लगाए या ना लगाए लेकिन आप अगर पढ़े लिखे है बुद्धिजीवी है तो एक राजा के छोटे से भी गलत काम को टोंके जरूर । बिना भयभीत हुए । और पहले तो कोशिश करे कि कोई दुराचारी इंसान कभी हुकूमत ना कर पाए ।

 

अपना हो या पराया अगर वह कोई न्याय के आसान पर बैठा है तो उससे न्याय ही करवाए और यही इतिहास काल से बीरबल मंत्रियों द्वारा होता भी रहा है ।

बाकी समस्या हर जगह है आप जैसे होनहार योग्य गुणी और पढ़े लिखे युवाओं से मैं यही अपेक्षा करूंगा की समस्या के साथ उसका हल भी खोजे । यही सच्चे मायने में जन्मभूमि के प्रति हमारी भक्ति भी होगी ।

आम जनमानस को जागरूक जरूर करते रहे, शिक्षा का कार्य आप कर ही रहे है जो की अत्यंत सराहनीय है बच्चो में संस्कार भरते रहे ताकि आने वाली पीढ़ी सचेत रहे अपने कर्तव्यों के प्रति, ग्राम विकास संबंधी योजनाओं को सबको बताते रहे, सरकारी संपत्तियां हमारे लिए कितनी जरूरी है यह एहसास लोगो में भरते रहें । क्योंकि भगवान ने आपको मात्रभूमि से जोड़ रखा है जो की आज के समय में जहां हर नौजवान बाहर भग रहा है यह काफी महत्वपूर्ण है और आपका सौभाग्य भी है ।


आपका पुनः धन्यवाद । हम सब राजा और प्रजा मिलकर जरूर पूरी ग्राम सभा को जरूर शिखर तक पहुंचाएंगे । ऐसा मेरा विश्वास है ।


राम राम

अमरेंद्र शुक्ला

शनिवार, 17 दिसंबर 2022

 हर नारी दुर्गा नही और हर पुरुष राम नही ।

सूपर्णखा और रावण भी है हर कोई भगवान नही ।।

सोमवार, 14 नवंबर 2022

तेरी खामोशी में बिखरा कोई दर्द नजर आता है ।
तेरे अरमानों की दुनिया का कोई खाब अधूरा नजर आता है ।।
ऐ दोस्त तेरी जिंदगी का फलसफा क्या है हमे नही पता ।
पर खोल अपनी आंखे खाबो के भीतर, तेरा पूरा आसमां मुझे नजर आता है ।।

रविवार, 6 नवंबर 2022

सम्पूर्ण तथ्य के ज्ञान बिना अपने छुद्र दिमाग की संकुचित सोच किसी पर थोप कर अपने व्यक्तित्व की परिभाषा नही देनी चाहिए ।

शनिवार, 5 नवंबर 2022

 ऐ खुदा उनकी जिंदगी में भी बहार ला दे ।

जिनको वो चाहते हों उनसे उन्हे मिला दे ।।

मायूस लगते हैं वो जब जमाने की चमक देखते हैं ।

करके कुछ करिश्मा उनकी खुशियां उन्हे नसीब करा दे ।।

गुरुवार, 3 नवंबर 2022

नजरें मिली, नजारें मिले खुश हुआ चलो उनको चाहने वाले मिलें लेकिन इस मुस्कुराते चेहरे को अब किस बात के शिकवे गिले हुए ।।

 हर कोई तलाश रहा था दौलत, कोई दौलतमंद ना मिला ।

एक फकीर को छोड़कर तेरी दुनिया में कोई अमीर ना मिला ।।

शनिवार, 8 अक्टूबर 2022

खूबसूरत चांद पर

 खूबसूरत चांद पर ये काले धब्बे अच्छे नही लगते ।

मुस्कुराते लबों पर अश्कों के बूंद अच्छे नही लगते ।।

रोना ही है तो रोना जब हम ना रहें  तुम्हारे जीवन में ।

हमारे रहते तुम्हे कोई गम छू जाए, ये बर्दास्त नही कर सकते ।।

अमरेंद्र !!

शनिवार, 24 सितंबर 2022

चांद आया है ।

 आसमां इतना पिघला कि जमीं पर सैलाब आया है ।

जो सोचा ही नहीं वो मंजर नजर आया है ।।

यकीन नही होता की जिंदगी इतनी हसीन होती है ।

मानो चांद पूरे शबाब में होकर जमी पर उतर आया है ।।

सोमवार, 28 फ़रवरी 2022

 मोहित !

ये भड़काऊ मैसेज जहाँ से आये कड़े शब्दो मे उन्ही को रिवर्ट कर दो ।

अगर इनमें कोई एफ आई आर किया जाए तो पहले उसी को पकड़ा जाएगा जिसने शेयर किया । इसलिए ऐसी चीजों को फैलाने से बचो, क्योंकि ऐसी चीजें सामाजिक समरसता बिगाड़ने वाली असवैधानिक हैं ।।

बाकी ऐसे गन्दे लोग समाज को खोखला करने वाले गंदी नाली से भी ज्यादा गन्दे लोग है । जिनकी औकात मोबाइल तक ही सीमित है ।


और मैं ग्रुप को राजनीति विहीन रखने पर इसीलिए जोर देता रहता हूँ , कि इंटरनेट का जमाना है । ऐसे में कोई भी  कुछ भी उठा कर बोल देगा, कह देगा । 

इससे सिर्फ फालतू की बहसबाजी के सिवा कुछ होना नही है । 

कोई दिल्ली में बैठा कह देगा राम हमारे खतरे में है तो कोई सूरत में बैठा कह देगा आज वोवैसी ने बोला कि अल्ला हमारा खतरे में है अब सामने कोई कुछ बोले तो उसे उत्तर भी पूरा मिले, इंटरनेट में बस जुबानी द्वंद छोड़ कुछ होना नही है ।

या तो बिना मतलब के अपना टाइम वेस्ट करो, फालतू के बहस में ।

अब इसी को ले लो इसकी औकात नही है कि किसी भी जाति या धर्म का अपमान सामने से आकर करे , लेकिन मोबाइल में देखो हिटलर का अम्मा लग रहा है । 

तो इंटरनेट की दुनिया मे ऐसे लोग भरे पड़े हैं, कोई हिंदुओं को खत्म कर रहा है तो कोई मुस्लिम भगा रहा है कोई भीम आर्मी बनाये बैठा है, तरह तरह की नीचता और नीच लोगो से इंटरनेट भरा पड़ा है अब किसको किसको ढूंढते फिरोगे । 

इसलिए इसमें सिर्फ सकारात्मक और अच्छी चीजों को पकड़ो और उनसे मजबूत बनो और समाज को मजबूत बनाओ ।।

और राजनीति इतनी वाहियाद चीज है कि इसमें जो दिखता है वो होता नही है । इसमे अगर जरूरत पड़ जाए तो अपने बाप की भी बली चढ़ा देते है । ये तो छोटी मोटी ऑडियो क्लिप है ।

मैं कुछ बड़े नेताओं की जिंदगी बहुत करीब से देखा हूँ । एक दो के आज भी नम्बर है फ़ोन व्हाट्सप मैसेज भी आ जाते है ।

राजनीति की गहराई में इतनी गन्दगी है कि उसका सम्पूर्ण वर्णन शब्दों से सम्भव नही ।

इस ऑडियो क्लिप की सच्चाई कुछ भी हो सकती है और सोसल मीडिया झूठ, फैलाकर, जाति और धर्म मे नफरत भरने के लिए जानी जाती है...

अर्थात 

सच्चाई कुछ भी हो सकती है, किसी भी कंडीसन में भलाई ऐसी चीजो से नही है और अफवाहों से दूर रहो, उससे होगा कुछ नही बस इतना होगा कि तुम्हारे अंदर एक आग लग जायेगी और ये बन्दा तुम्हे मिलेगा नही कोई दूसरा तुम्हारे आस पास गाँव का जो इसकी बिरादरी का होगा उसी से नफरत करोगे और उसी को इसकी लगाई आग से किसी निर्दोष को जला बैठोगे नही भी जलाओगे तो मन मे ऑडियो क्लिप का जहर हमेशा बसा रहेगा कि ये अम्बेडकर वाले लोग हैं ।

उसकी क्या सोच है वो समझ ही नही पाओगे माइंड में क्लिप में बोली गई जुबान अपने ही विचार ही फेंकती रहेगी ।।

 सारे दंगों की जड़ यही एक चीज है कि एक किसी कौम का अधर्मी हमारे दिमाग में उस पूरी जाति के प्रति अधर्म  की पिक्चर बना देता हैं ।

और बदले की नाभकीय संलयन प्रक्रिया पीढ़ी दर पीढ़ी चलती रहती है ।।

इंटरनेट की दुनिया से सिर्फ सही चीजे उठाओ और सही चीजे परोसो ।।

ये मात्र एक सलाह है । बाकी भड़काऊ लपटें तेजी से धधक रही है और कूदने वाले भी स्वतंत्र ही होते हैं ।।

कौम और जाति किसी की खतरे में नही है हां इंसानियत जरूर खतरे में है 


ब्राह्मण हो या ठाकुर उसका अस्तित्त्व उसी के हाथ मे हैं । कोई दूसरा कोई किसी को नही मिटा पायेगा ।।

जब ठाकुर फौलादी सीने को वैश्यालय की आंच से पिघलायेगा तो उसका नाश होना है ।

और ब्राह्मण जब अपनी पोथी को पैरों तले कुचल कर हाथ मे बोतल शराब की थामेगा तो उसका भी विनाश होना है ।।

और कोई अगर अपने मूल और अपनी असलियत को लिए जिंदा है तो उसका कोई कुछ नही बिगाड़ पायेगा ।।


एक शिवा जी बनकर देखो लाख भेड़ियों पर भारी पड़ोगे ।

कर लो खुद को स्वच्छ अगर तो इन गन्दे सूड़ो को पल में साफ करोगे ।।

सोमवार, 4 मई 2020

इंसानी जज्बा |

सितारों में तलाशूँ तो जिंदगी वहीं नजर आती है |
बहारो को देखूँ तो साँसे वहीं सुकून पाती हैं ||
हैरत नहीं मुझे कि आसमां में भी आशियाना हो सकता है |
ये जूनून हैं जनाब खाबों का भी जिन्दा वजूद हो सकता है ||
बेचैनी जब होती है दिल में तो वजूद खुदा का भी हिल जाता है |
सच मानो मुसाफिर है गर सच्चा तो आसमां भी पैरों तले आ जाता है ||

रविवार, 19 अप्रैल 2020

Love can be dangerous.


मधुशाला राम से बढ़कर ! मेरा विरोध |

बता देंगे अगर मय को मधु
तो मधु की परिभाषा क्या होगी ||

ठहरा देंगे जो कातिल को सही |
तो गुनाह की परिभाषा क्या होगी ||

गुरूर तो है मुझे कभी मधुशाला नहीं लिखा |
बड़ी से बड़ी मजबूरी को वैश्यालय नहीं लिखा ||

गम में जाम मिलाने को सादगी नहीं कहते |
जो हार जाए स्वयं से उसे बहादुरी नहीं कहते ||

जीवन तो है ही आंसुओं की धारा |
सुलगती रेत में उम्मीदों की प्याला |

मगर पथविहीन हो जाये नर अगर
तो उसे कभी राही नहीं लिखा |

फक्र है कलम पर दिल के घूँट को
 मदिरा की प्याली नहीं लिखा ||
......................अमरेंद्र.......................
मधु का मतलब शहद या मीठा होता है लेकिन इसका दूसरा मतलब शराब से भी लगाते है क्योंकि कभी शराब शहद से ही बनाई जाती थी पर इसका अर्थ ये नहीं कि उसे मधु का नाम दे दिया जाए इसलिए मधु का अर्थ शराब लगाना मेरे नजरिये से गलत है |हालांकि कहा जाता है बच्चन साहब ने शराब को कभी हाथ नहीं लगाया | लेकिन गुनाह ना करने से ज्यादा गलत गुनाह पैदा करना है |